चैत्र नवरात्रि पर कविता: इस वर्ष 6 अप्रैल शनिवार से नवरात्र का शुभ पर्व शुरू हो रहे हैं। इस पर्व को पुरे भारतवर्ष में सभी हिन्दू परिवारों में बड़े ही उत्साह पूर्वक बनाया जाता है | कहा जाता है की वर्ष में दो बार नवरात्रि का पर्व आता है लेकिन दोनों ही नवरात्र का महत्व और पूजा विधि अलग है | आज में आपके साथ यह पोस्ट ” चैत्र नवरात्रि पर कविता 2019 – Chaitra Navratri par Kavita in hindi for facebook and whatsapp ” शेयर कर रहा हु जिसे आप अपने परिवारजनों के साथ आसानी से सोशल मीडिया के माध्यम से शेयर कर सकते है |

यह पर्व नौ दिनों तक चलता है व् हर दिन अलग देवी माँ के प्रतिरूप की पूजा होती हैं और उनको प्रसन्न करने के लिए व्रत भी रखा जाता हैं शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन अभिजीत मुहूर्त में 6 बजकर 9 मिनट से लेकर 10 बजकर 19 मिनट के बीच घट स्थापना करना बेहद शुभ होगा।

शुभ चैत्र नवरात्रि पर कविता

चैत्र नवरात्रि पर कविता 2019 – Chaitra Navratri par Kavita in hindi for facebook and whatsapp

नवरात्री में नवदुर्गा नव नव रूप धरे
हर रूप की अपनी महिमा
कुछ शब्द न कह पाएं
शैलपुत्री तुम प्रथम कहलाती
हिमराज की सुता कहलाती
द्वित्य ब्रह्म चारिणी हो तुम
दुखियों की दुखहारिणी हो तुम
चंद्र घटना तृतीय रूप है तेरा
दुष्ट प्रकम्पित होते सारा
कुश्मांड़ा तेरा रूप चतुर्थकम
उल्लास का देती नया सोपनं
पंचम स्कन्द माता कहलाती
कार्तिकेय के संग पूजी जाती
षष्टम कात्यायनी हो तुम
कात्यान ऋषि की सुता हो तुम
कालरात्रि तेरा सप्तम रूप है
दुष्टो का बेडा गर्क है
अष्टम में तुम महा गौरी
कुंदन सुमन सी कोमल नारी
नवम सिद्धि दात्री हो तुम
सुख समृद्धि और मोक्ष की माता हो तुम

चैत्र नवरात्रि पर कविता इन हिंदी

चैत्र नवरात्रि पर कविता 2019 – Chaitra Navratri par Kavita in hindi for facebook and whatsapp

गूंज उठा जयकारा पृथ्वी और गगन से
भक्त वृन्द मगन हुए आपके दर्शन से
नूपुर और ढाक का संगीत गूंज रहा है
जन जन में आपका स्वररूप दिख रहा है
शुभ आगमन है माँ शुभ आगमन है
फुले पे बहार बांके कलियों की निखार बनके
रंगो का गुलाल बनके सिंह पे सवार होके
आजा मेरी माँ आजा
शुभ आगमन है माँ शुभ आगमन है

Chaitra Navratri par Kavita in hindi

तू ही कर्म कराती मैय्या, तू ही भाग्य बनाती है,
सारी दुनिया तेरी महिमा, तू ही खेल रचाती है।
ब्रह्मा, विष्णु और सदाशिव, सब में तेरी शक्ति मां,
कभी तू गौरी, कभी कालिमा, नित नए रूप बनाती मां।
तू ही शक्ति, तू ही भक्ति, विद्या और अविद्या है,
राम भी तू, रावण भी तू ही, तू ही युद्ध रचाती है।
सूरज-चंदा तेरे सहारे, सप्तऋषि और सारे तारे,
सारी सृष्टि उधर घूमती, तू करती जिस ओर इशारे।
आग में बाग लगाती मैय्या, सागर पीती बन ज्वाला,
पूजा-पाठ की अग्नि तू ही, मधुशाला की तू हाला।
तूने जन्मा सारे जग को, तू ही गोद खिलाती है,
कालचक्र का घुमा के पहिया, वापस हमें बुलाती है।
सारी दुनिया तेरी महिमा, तू ही खेल रचाती है।

Chaitra Navratri par Kavita in hindi for facebook

सिंह की सवार बनकर
रंगों की फुहार बनकर
पुष्पों की बहार बनकर
सुहागन का श्रंगार बनकर
तुम्हारा स्वागत है माँ तुम आओ
खुशियाँ अपार बनकर
रिश्तों में प्यार बनकर
बच्चों का दुलार बनकर
समाज में संस्कार बनकर
तुम्हारा स्वागत है माँ तुम आओ
रसोई में प्रसाद बनकर
व्यापार में लाभ बनकर
घर में आशीर्वाद बनकर
मुँह मांगी मुराद बनकर
तुम्हारा स्वागत है माँ तुम आओ
संसार में उजाला बनकर
अमृत रस का प्याला बनकर
पारिजात की माला बनकर
भूखों का निवाला बनकर
तुम्हारा स्वागत है माँ तुम आओ
शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी बनकर
चंद्रघंटा, कूष्माण्डा बनकर
स्कंदमाता, कात्यायनी बनकर
कालरात्रि, महागौरी बनकर
माता सिद्धिदात्री बनकर
तुम्हारा स्वागत है माँ तुम आओ
तुम्हारे आने से नव-निधियां
स्वयं ही चली आएंगी
तुम्हारी दास बनकर
तुम्हारा स्वागत है माँ तुम आओ

Happy Chaitra Navratri par Kavita in hindi for whatsapp

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यहां पर रखी मां हटानी नहीं थी
झूठी भक्ति उसकी दिखानी नहीं थी
चली आ रही शक्ति नवरात्रि में जब
जला ज्योति की अब मनाही नहीं थी
करे वंदना उसी दुर्गे की सदा जो
मनोकामना पूर्ण ढिलाई नहीं थी
चले जो सही राह पर अब हमेशा
उसी की चंडी से जुदाई नहीं थी
कपट, छल पले मन किसी के कभी तो
मृत्यु बाद कोई गवाही नहीं थी
सताया दुखी को किसी को धरा पर
कभी द्वार मां से सिधाई नहीं थी
चली मां दुखी सब जनों के हरन दुख
दया के बिना अब कमाई नहीं थी
भवानी दिवस नौ मनाओ खुशी से
बिना साधना के रिहाई नहीं थी

Poem on Chaitra Navratri in Hindi

तू ही कर्म कराती मैय्या, तू ही भाग्य बनाती है,
सारी दुनिया तेरी महिमा, तू ही खेल रचाती है।
ब्रह्मा, विष्णु और सदाशिव, सब में तेरी शक्ति मां,
कभी तू गौरी, कभी कालिमा, नित नए रूप बनाती मां।
तू ही शक्ति, तू ही भक्ति, विद्या और अविद्या है,
राम भी तू, रावण भी तू ही, तू ही युद्ध रचाती है।
सूरज-चंदा तेरे सहारे, सप्तऋषि और सारे तारे,
सारी सृष्टि उधर घूमती, तू करती जिस ओर इशारे।
आग में बाग लगाती मैय्या, सागर पीती बन ज्वाला,
पूजा-पाठ की अग्नि तू ही, मधुशाला की तू हाला।
तूने जन्मा सारे जग को, तू ही गोद खिलाती है,
कालचक्र का घुमा के पहिया, वापस हमें बुलाती है।
सारी दुनिया तेरी महिमा, तू ही खेल रचाती है।

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